साधना के पथ पर

अद्य की स्याही

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जो बचपन पल रहा फूटपाथों पे

Posted On: 27 Jan, 2012 न्यूज़ बर्थ में

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जो बचपन पल रहा फूटपाथों  पे,

कभी गर्मी, कभी वर्षा, कभी सर्दी;

भारी पड़ती उनके आरमानों पे. 

 

राते इनकी किस्मत में ,

काँटें इनके दामन में,

महसूस करो दर्द को,

काँटों के चुभ जाने पे.

 

न कोई आस न कोई पास,

बस भूख और प्यास;

तुम समझ सकते हो,

जो गुजरती है ऐसे इंसानों पे.

 

एक नयी सुबह की आस लिए,

दिल में एक बिस्वाश लिए,

ये  फूटपाथों पे सोनेवाले,

जाने क्या गुजरती, इनके जाग जाने पे.                                               

                                          

ये मासूम चेहरे और खामोश निगाहें,

कुछ और ही कहती है  ‘अलीन’,

मत जाओ इनके मुस्कुराने पे.

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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

MAHIMA SHREE के द्वारा
February 22, 2012

अलीन जी , मार्मिक अभिव्यक्ति ,… “न कोई आस न कोई पास, बस भूख और प्यास; तुम समझ सकते हो, जो गुजरती है ऐसे इंसानों पे. ” सच में रास्तो में जब इन्हें भटकते हुए , खाने के लिए कुरे के ढेरो में चुनते बीनते देख मन व्याकुल हो जाता है.. और न कुछ कर पाने की विवशता पर दुखी.. अभिवादन…….

ANAND PRAVIN के द्वारा
February 18, 2012

मित्र, अभी – अभी मन हुआ तुम्हारे पुराने लेखों को पढूं तभी मेरी नजर पड़ी इस पर मैंने इसे पहले भी पढ़ा था किन्तु मने कमेन्ट नहीं किया था (उस वक़्त दोस्ती नहीं हुई थी सायद) चुकी मैंने भी इस विषय पर एक कविता लिखी थी तो तुम्हे सुनाने की इच्छा हुई लिंक दे रहा हूँ एक बार अवस्य पढ़ना http://anandpravin.jagranjunction.com/2012/01/09/वो-कौन-खडा-है-दूर-वहाँ-दुर् ………………………………………………………………………………………………………………………….. वैसे तुम्हारी प्रेम कहानी पर मैंने कुछ ज्यादा ही लिख दिया था इसके लिए क्षमा माँगता हूँ

    February 18, 2012

    मित्र, दोस्ती नहीं हुई थी, इसीलिए नहीं पढ़े बहुत अच्छी आदत है…शाबाश. गुनाह भी भी करते हो और शान से कहते हो कि गुनाहगार हूँ. भाई तुम्हारी हिम्मत की दाग देनी पड़ेगी. अबे तू दोस्त है कि दुश्मन….खैर जो भी हो बहुत प्यारे हो. युही इस रिश्तें को निभातें रहना. जब हम दोनों का रिश्ता यहाँ तक पहुँच गया है तो एक राज कि बात बताता हूँ किसी को बताना नहीं. अभी तक मैं जो भी कविता पोस्ट किया हूँ, उसे मैं तेरह वर्ष की उम्र में लिखा हूँ. इसके अलावा English, भोजपुरी में भी लिखा हूँ.सच पूछों तो मेरी प्रथम रचना English में ही थी. कुल 8-9 पोएम्स, 12th तक आते-आते लिखा . फिर English बंद करके हिंदी और भोजपुरी में लिखने लगा. कारण मैं अपनी आवाज आम लोगों तक पहुचना चाहता था क्योंकि मैं भी तो एक आम आदमी हूँ. हमारी दोस्ती हमेशा बनी रहे, और हमारा साथ आगे चलकर सबके लिए कल्याणकारी हो बस यही उम्मीद करता हूँ……///आमीन.

aashutoshmishra के द्वारा
February 5, 2012

उम्दा रचना अलीन जी,  बधाई, कुछ ऐसी ही पीड़ा और मर्म मैंने भी महसूस किया देखना चाहें तो http://aashutoshmishra.jagranjunction.com/2012/02/05/…बचपन/

    अलीन के द्वारा
    February 5, 2012

    आशुतोष जी……आपको मेरी रचना पसंद आई. इसके लिए बहुत आभार..

Rakesh के द्वारा
February 2, 2012

अलीन जी, बहुत ही उम्दा. बधाई. खासकर ये पंक्तियाँ “मत जाओ इनके मुस्कुराने पे.” बहुत ही सुन्दर.

sinsera के द्वारा
January 29, 2012

अनिल जी, नमस्कार, कोमल भाव व्यक्त करती रचना.. एक बात और..”अलीन “का अर्थ जानना चाहूँ गी…

    अलीन के द्वारा
    January 31, 2012

    सिंसेरा जी, आपको भी नमस्कार ! ..”अलीन “का अर्थ अग्राह्य से है…


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