साधना के पथ पर

अद्य की स्याही

50 Posts

1446 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 8647 postid : 9

मेरी सदा-एक वादा

Posted On: 27 Jan, 2012 Others,न्यूज़ बर्थ में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

मेरी सदाआपने बहुत सी कहानियां पढ़ी और सुनी होगी. पर आने वाले दिनों में, आप जो कहानी पढ़ने जा रहें हैं, कुछ खास है क्योंकि ये सिर्फ कहानी ही नहीं एक हकीकत है जिसे ना आप इंकार कर सकते है और ना ही मैं. ‘मेरी सदा’ आज की परिवेश की ‘एक अधूरी परन्तु सच्ची प्रेम कहानी’ है. जहाँ एक तरफ मानव चाँद पर पहुँच गया है, वही दूसरी तरफ आज भी कुछ लोग अपने घरों से निकलना नहीं चाहतें हैं. यह कहानी है मेरी; ‘अन्जानी और अनिल’ की. जो कभी हम दोनों वादा किये थे एक-दुसरे का साथ निभाने और एक साथ सामाजिक कुरीतिओं से लड़ने का. पर जब अपनों का सामना होता है तो कब हकीकत ख्वाब में तब्दील हो जाता है, यकीं नहीं होता. आज मेरा हमसफर मेरे साथ नहीं पर वो वेवफा भी नहीं, उससे किया हरेक वादा मुझे निभाना है. ताकि आने वाली पीढियां हमारे प्यार को याद करें और याद करें अन्जानी के बलिदान और अनिल की वफ़ा को. ‘मेरी सदा’, एक प्रयास है, ‘अन्जानी’ और ‘अनिल’ जैसे रिश्तों को बचाने की, जो समाज के रुढ़िवादी परम्पराओं की बलि चढ़ जातें हैं या मजबूर होकर मौत को गलें लगाते है. यह मेरे और मुझ जैसे लोगों की जीने की आशा है जिनसे जिंदगी रूठी हुई है. ‘मेरी सदा’, एक एहसास है अपने माता-पिता और समाज को कराने की कि यदि यदि धर्म, भगवान और कानून अपना जीवनसाथी चुनने का अधिकार देते हैं तो इस रिश्तें को पूर्ण करने के लिए आप सबका आशीर्वाद साथ क्यों नहीं. हम भी मानव है और जिनके अपने कुछ भावनाएं और सपने हैं. हमें आपकी नफ़रत नहीं चाहिए और ना ही आपके द्वारा दिया गया मृत्युदंड. हमें अपनी जिन्दगी जीने का अधिकार चाहिए, वो भी आप लोगों के आशीर्वाद के साथ.
बहुत जल्द ही ‘मेरी सदा’, ‘एक अधूरी परन्तु सच्ची प्रेम कहानी’, आपके बीच लेकर आ रहा हूँ. हो सकता है कि यह कहानी आप तक पहुचने से पहले, मैं इस दुनिया में न रहूँ. पर यदि मैं जिन्दा रहा तो मेरी सदा (विचारों, लेखों और गीतों के रूप में) मेरी आवाज बनकर इस जमीं और आसमान पर गुजेंगी.  आपसे बस इतना वादा है.

(चित्र गूगल इमेज साभार )

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (31 votes, average: 4.94 out of 5)
Loading ... Loading ...

6 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

MAHIMA SHREE के द्वारा
February 22, 2012

अलीन जी , नमस्कार , ईश्वर आपको लम्बी उम्र दे , यही कामना है..ताकि आप समाज में फैले जात पात की क्रूरता को दूर कर , अपने जैसे लोगो को पीड़ा से मुक्त करे..आप ने सही कहा ” आये दिन गीता और रामचरित मानस के पाठ करने वाले और महान मान-मर्यादा वालें लोग यह नहीं जानते कि ये क्या कर रहें है. अतः मैं परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि हमें सोचने-समझने कि शक्ति दे ताकि हम सभी मिलकर अपने अन्दर पनप रही बुराइयों को ख़त्म कर सके, जो मानवता को ताड़-ताड़ करती है. यदि हम सभी कुछ ख़त्म करना चाहतें तो अपने अन्दर पल रहें नफरत, द्वेष और जात-पात को ख़त्म करना होगा. ” श्री राम और कृषण ने तो आगे बढ कर समाज के सभी वर्गों को गले लगाया…….पर हमारा समाज उनके फोटो पर आँख बंद करके अगरबती जलाने के आलावा और कुछ नहीं करता..या कहे जानबूझ कर उनकी achhaiyo को जीवन में अपनाने के बजाये अपने स्वार्थ और जिद को प्राथमिकता देता है और owner killing ke नाम पर शैतानी खेल को जारी रखना चाहता है..ये मानसिक रूप से बीमार लोग है जिन्हें इलाज की जरुरत है ..इन्हें pshychetrist ke paas भेजना चाहिए……

    February 22, 2012

    आखिर कितने लोगों को उनके पास भेंजेंगे. वो लोग भी इतने लोगों को साथ देखकर मानसिक रूप से बीमार हो जायेंगे, अब तो हम सभी को ही मनोचिक्तिसक बनना होगा. तभी जाकर कुछ होने वाला है…

D33P के द्वारा
February 20, 2012

मैं इस दुनिया में न रहूँ. पढकर ज्यादा मन विचलित हो गया आपकी लेखनी के साथ का चित्र मन को विचलित कर रहा है और आपकी मानसिक स्तिथि भी बयां कर रहा है अलीन जी आपकी कहानी ‘मेरी सदा’, ‘एक अधूरी परन्तु सच्ची प्रेम कहानी’ मंच पर आ गई और उस पर बहुत सारी प्रतिक्रियाएं हमने देखी.आपने भी देखी .इश्वर आपको लम्बी उम्र दे और हिम्मत जुटा कर अनजानी को अपना हमसफ़र बना कर जीवन यापन करे…आपकी आप बीती से बहुत से दिलो को तकलीफ हुई है ,उन्हें भी आप अपनी खुशियों में अवश्य शामिल कीजियेगा शुभकामनाओ के साथ ..

    February 20, 2012

    सादर नमस्कार! यह सच है कि मैं मानसिक रूप से परेशां हूँ पर कायर नहीं जो आत्महत्या करूँ. पर मुझे लगता है कि आज नहीं तो कल मैं मारा जाऊ. भविष्य में यदि मेरे साथ ऐसा कुछ होता है तो इसका जिम्मेदार सिर्फ हमारी गलत परम्पराएँ और रीति रिवाज होंगे न कि कोई व्यक्ति विशेष. आखिर मैं किसको दोष दूँ, इधर भी अपने है उधर भी अपने हैं. सामाजिक कुरीतियों के प्रति लड़ाई व्यक्ति विशेष से न होकर, बुराई से हो तो बेहतर. तब जाकर ऐसी समस्यों का सही अर्थों में समाधान निकलकर आएगा. बहुतों को लगता है कि दुनिया बदल रही हैं. यदि हम शहरों से अपना रुख गाँव की ओर करें तो पाएंगे कि ये सीधे-साधे दिखने वालें चेहरों के पीछे एक दरिंदा छुपा हुआ. यदि ऑनर किल्लिंग जैसी कोई घटना शहर में घटित होती हैं तो पूरी दुनिया जान जाती पर यह गावों में आये दिन घटित होती रहती है और किसी को भनक तक नहीं होती हैं. मेरे आस-पास के जिलों में पिछले दो महीनों में कुछ नहीं तो १५-२० ऐसी घटनाएँ हुई और जगहों की बात ही छोडिये. अधिक से अधिक क्षेत्रीय समाचार पृष्ठ पर आई और हम सभी पढ़कर मजा लिए और उस बात को भूल गएँ. मैं किसी को सजा देने की बात नहीं कर रहा हूँ क्योंकि आये दिन गीता और रामचरित मानस के पाठ करने वाले और महान मान-मर्यादा वालें हम लोग यह नहीं जानते कि ये क्या कर रहें है. अतः मैं परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि हमें सोचने-समझने कि शक्ति दे ताकि हम सभी मिलकर अपने अन्दर पनप रही बुराइयों को ख़त्म कर सके, जो मानवता को ताड़-ताड़ करती है. यदि हम सभी कुछ ख़त्म करना चाहतें तो अपने अन्दर पल रहें नफरत, द्वेष और जात-पात को ख़त्म करना होगा. आप लोगों की प्रतिक्रियाओं और साथ का आभारी हूँ तो अपनी खुशियों में आप लोगों को कैसे भूल सकता हूँ. मैं भी यही सोच रहा था आखिर हम सभी इस ब्लॉग रूपी परिवार के सदस्य हैं ………आप सभी का, अलीन.

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    February 20, 2012

    मित्र मरने मारने की बातें क्यूँ करते हो अरे दुनिया में और भी बहुत गम है दिल लगाने के सिवा ये याद रखना धेर्य रखो सब ठीक हो जाएगा

    February 21, 2012

    मित्र, गम क्या होता है तुमसे बेहतर कौन समझ सकता है.


topic of the week



latest from jagran