साधना के पथ पर

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अबकी होलिया में हो, अबकी होलिया में

Posted On: 7 Mar, 2012 मस्ती मालगाड़ी में

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आप सभी को होली मुबारक!

अबकी होलिया में हो, अबकी होलिया में,
छोड़ के नईहरवा, चल जा ससुरवा ना.


ससुरा में खोजत होइहें ननद जेठानी,
गाँव के गोरियां जहाँ भरत होइहें पानी;
पानी में रंग डूबल, रंग में जवानी,
जवानी में डूबल इ दुनिया सारी.
अबकी होलिया में हो, अबकी होलिया में,
पूरा कर द, सास-ससुर के अरमानवां
ना.


नइहर में बचपन बितवलू,
माई-बाबु के दुलार तू पवलू,
भैया के तू बहुतें सतवलू ,
अबकी होलिया में हो, अबकी होलिया में,
देखत होइहें रहिया,सास-ससुरवा ना.


सखियन संग नचलू, तू गवलू,
बाग-बगीचा में धूम मचवलू,
सबकरा के दीवाना बनवलू,
अबकी होलिया में हो, अबकी होलिया में ,
सैंया बिछैले होइहें, तोहरे राह में नयनवां ना.


नइहर में राज कईलू बनके तू रानी,
कबतक कटबू इहाँ आपन जवानी ,
सोच ससुरा के होके, कैसे नइहर में बानी.
अबकी होलिया में हो, अबकी होलिया में हो
अलीन देखत होइहें तोहरे सपनवा ना.

(चित्र गूगल इमेज साभार)

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38 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

chandanrai के द्वारा
March 12, 2012

अलीन जी नमस्कार, कमाल के फागुन के भोजपुरी रंग, सखियन संग नचलू, तू गवलू, बाग-बगीचा में धूम मचवलू, सबकरा के दीवाना बनवलू, अबकी होलिया में हो, अबकी होलिया में , सैंया बिछैले होइहें, तोहरे राह में नयनवां ना अनुरूप खूबसूरत रचना माटी के रंग bejod http://chandanrai.jagranjunction.com

March 12, 2012

हार्दिक आभार….!

MAHIMA SHREE के द्वारा
March 10, 2012

अलीन जी नमस्कार….क्या बात है……???आप तो पुरे फागुन के रंग में रंग गए है……बेहद रूमानी मौसम के अनुरूप रचना ……बधाई …..

alkargupta1 के द्वारा
March 10, 2012

अनिल जी , होली के रंगों से सराबोर भोजपुरी भाषा में लिखी रचना बहुत अच्छी लगी……

March 9, 2012

अलीन भाई नमस्कार… क्या भाई आपने तो कमाल ही कर दिया…क्या खूबसूरत भोजपुरी लिखी है… नइहर में राज कईलू बनके तू रानी, कबतक कटबू इहाँ आपन जवानी , सोच ससुरा के होके, कैसे नइहर में बानी. अबकी होलिया में हो, अबकी होलिया में हो… अब सपने से बाहर आवा और होली के मज़ा ल….

बनारसी बाबू के द्वारा
March 9, 2012

अनिल जी, होली के रंगों से माटी की खुश्बू बहुत ही अच्छी लगी. सादर.

mparveen के द्वारा
March 9, 2012

बहुत अची रचना अनिल जी कमेन्ट नहीं हो पा रहे थे आज लोगिन किया तो हो रहे हैं … उम्मीद है आपकी होली अछी रही होगी …. धन्यवाद…

मनु (tosi) के द्वारा
March 9, 2012

बहुत सुंदर रचना अनिल जी … बधाई

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
March 9, 2012

रचना में आंचलिकता की सोंधी-सोंधी गंध ,बधाई !! कविता का सौन्दर्यीकरण कैसे करते हैं,जानकारी देंगे |

    March 9, 2012

    सादर प्रणाम ! आपका मार्गदर्शन मिलें इससे बड़ी बात मेरे लिए क्या हो सकती है, आप जानकारी दीजिये मैं पूरी कोशिश करूँगा उसे अपनी कविताओं में उतारने की. दरअसल यह कविता नहीं है, यह एक भोजपुरी गीत है जो मर्यादा के साथ-साथ दर्शन से भी जुड़ी है. मैं विशेष रूप से गीत, ग़ज़ल और शेर ही लिखता हूँ. आप लोगों के बीच से सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाया हूँ और साथ ही आप लोगों के आशीर्वाद की इच्छा भी रखता हूँ. इसलिए वही लिखता हूँ जो मेरे अभियान से जुड़ा हुआ है. चूँकि होली का माहौल था सो सोचा की अपना एक गीत ही पोस्ट कर दूँ……आपके मार्गदर्शन का हमेशा स्वागत रहेगा, मेरे लिए गर्व की बात होगी…..

jalaluddinkhan के द्वारा
March 8, 2012

होली पर होली के रंगों में रंगी एक भावनात्मक कविता.अति सुन्दर,बधाई. आप,आपके परिवार और आपके शुभचिंतकों को होली मुबारक.

    March 9, 2012

    अस्सलाम वालेकुम! हार्दिक आभार,….. होली के ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ, आपको और आपके सभी अपनों को होली मुबारक

nishamittal के द्वारा
March 8, 2012

होली के रंगों से सजी सुन्दर रचना अच्छी लगी.

    March 9, 2012

    सादर प्रणाम! हार्दिक आभार,….. होली के ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ, आपको और आपके सभी अपनों को होली मुबारक

minujha के द्वारा
March 8, 2012

आंचलिक भाषा में लिखी आपकी ये रचना गांव वाली होली की याद दिलाती है अलीन जी,होली मुबारक

    March 9, 2012

    सादर नमस्कार! आपको अच्छा लगा…शुक्रिया… १० साल पहले मेरे द्वारा लिखी, भोजपुरी गीतों में से एक है. सोचा मौसम भी है और दस्तूर भी तो क्यों न आप सभी की सेवा में इसे प्रस्तुत किया जाय. होली के ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ, आपको और आपके सभी अपनों को होली मुबारक

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
March 8, 2012

सैंया बिछैले होइहें, तोहरे राह में नयनवां ना स्नेही अनिल जी नए कलेवर के साथ सुन्दर प्रस्तुति. पसंद आयी. शुभ होली.

    March 9, 2012

    सादर प्रणाम! हार्दिक आभार,….. होली के ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ, आपको और आपके सभी अपनों को होली मुबारक

shashibhushan1959 के द्वारा
March 8, 2012

मान्यवर अनिल जी, सादर ! सुन्दर भावनाएं ! अच्छी प्रस्तुति ! होली के रंग में रंगी ! होली की शुभकामनाएं !!!

    March 9, 2012

    सादर चरण स्पर्श, पिता श्री! हार्दिक आभार,….. होली के ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ, आपको और आपके सभी अपनों को होली मुबारक!

dineshaastik के द्वारा
March 8, 2012

ग्रामीण शब्दों की बाहुल्यता से अर्थ में बाध्यता असंभावी रही, किन्तु उससे रचना में रोचकता निश्चित ही आई…..हाँ को समझने में अधिक बौद्धिक व्यायाम नहीं करना पढ़ा। होली की शुभकामनायें प्रेषित कर रहा हूँ, कृपया अंगीकृत करें।

    March 9, 2012

    सादर नमस्कार!…. हार्दिक आभार,….. होली के ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ, आपको bhi और आपके सभी अपनों को होली मुबारक

akraktale के द्वारा
March 7, 2012

अनिल जी, सुन्दर रचना. मगर ऐसा न हो आप बाँट जोहते ही रहो.बधाई.

    March 9, 2012

    सादर प्रणाम! आपका आशीर्वाद है तो फिर डर किस बात का…. होली के ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ, आपको और आपके सभी अपनों को होली मुबारक

ANAND PRAVIN के द्वारा
March 7, 2012

वाह मित्र, हम ना जैबे ससुराल हो……………..अब की होलिया में ……..अब की होलिया में का करिबे जाई के ससुराल हो………….ना हमरा ससुरा बड़ा पैसा वाला…………अ ना सास के मुह पर लागल बा ताला…………..कहाँ से लैला इ सौगात हो ……….अबकी होलिया में…………अब की होलिया में “आज जले तब धुँआ उरे, बिन आग लगाए उराते हो, कहते हो की अनिल है हम, और “अलीन” रूप दिखलाते हो”

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    March 7, 2012

    आज को आग पढ़ लेना ………….वैसे तुम समझदार हो ही खुद समझ ही लेते …………और परिवार सहित होली मुबारक

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    March 7, 2012

    सुन्दर कविता, अनिल जी. होली की हार्दिक शुभकामनाएं.

    March 9, 2012

    सादर प्रणाम, सर! हार्दिक धन्यवाद….. होली के ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ, आपको और आपके सभी अपनों को होली मुबारक .आपका अनुज, अलीन

    March 9, 2012

    एक शायर की कृति यद् आ रही है मित्र, गौर फरमाना…. आप हर मंजिल को मुश्किल समझते हैं, और हम हर मुश्किल को मंजिल समझते हैं, बड़ा फर्क है आपके हमारे नजरिये में कि आप दिल को दर्द और हम दर्द को दिल समझते हैं….. होली के ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ, आपको और आपके सभी अपनों को होली मुबारक

    jlsingh के द्वारा
    March 10, 2012

    “आग जले तब धुँआ उरे, यहाँ तक तो ठीक है, बिन आग लगाए उराते हो, कहते हो कि अनिल है हम, और “अलीन” रूप दिखलाते हो” बहुत मजा आया मुझे भी दो नवजवानों के बीच में घुसने में ! मन थोड़ा गुदगुदाया, थोड़ा शरमाया, भरमाया और लौट के वापस आया! नइहर में राज कईलू बनके तू रानी, कब तक काटबू, इहाँ आपन जवानी , सोच ससुरा के होके, कैसे नइहर में बानी. अबकी होलिया में हो, अबकी होलिया में हो अलीन देखत होइहें तोहरे सपनवा ना……

ajaydubeydeoria के द्वारा
March 7, 2012

अलीन बाबू ! हम त तोहरे साथे ही बनीं. तूं त हाउअ जियरा हमार…. तूं ही त हमार हौसला बढवल…. कहाँ जाइब छोड़ के दुअरा तोहर…. ई कहिया ले अगोराई होई… कहिया ले ई सपना देखल जाई….. होली मुबारक…..

    March 9, 2012

    जब आप लोगों का साथ है तो सपना जल्द ही हकीकत में तब्दील हो जायेगा……..आमीन होली के ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ आपको और आपके सभी अपनों को होली मुबारक


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