साधना के पथ पर

अद्य की स्याही

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चेहरों के पीछे भी एक दास्तां है

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चेहरों के पीछे भी एक दास्तां है

चेहरों के पीछे भी एक दास्तां है,
यह चेहरों की दुनिया और ये दुनिया के चेहरे;
गौर से देखों, राज-ए-दिल खोलते हैं चेहरें,
खामोश हो होंठ तो बोलते है चेहरे;
मुश्किलों में कुछ यूँ, साथ निभाते हैं चेहरे,
रोती हैं आखें, पर मुस्कुराते है चेहरे.


चेहरों के पीछे भी एक दास्तां है,
यह चेहरों की दुनिया और ये दुनिया के चेहरे;
कभी ख़ुशी बनकर, हंसातें है चेहरे,
कभी गम बनकर, रुलाते हैं चेहरें;
कभी ऊँचाइयों पर, चढातें है चेहरें,
कभी खाइयों में, गिराते है चेहरे.


चेहरों के पीछे भी एक दास्तां है,
यह चेहरों की दुनिया और ये दुनिया के चेहरे;
कभी रोशनी बनकर, राह दिखाते हैं चेहरें,
कभी साया बनकर, डराते है चेहरे;
कभी बहार बनकर, छा जाते हैं चेहरें,
कभी तूफान बनकर, होश उड़ाते है चेहरे.


चेहरों के पीछे भी एक दास्तां है,
यह चेहरों की दुनिया और ये दुनिया के चेहरे;
सपनों में अक्सर, आ जाते हैं चेहरे,
बचना चाहें तो टकराते हैं चेहरे;
इन चेहरों से कैसे, बचाएं चेहरें,
जिधर जाएँ, उधर नजर आते हैं चेहरे.

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46 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sanjay dixit के द्वारा
March 23, 2012

बहुत खूब सही चित्रण

D33P के द्वारा
March 21, 2012

यही सच है जो आपने लिखा है कोई नहीं जाना पाया किसी चेहरे के पीछे का सच ….हर चेहरे के पीछे एक चेहरा है, ये राज़ बड़ा ही गहरा है

smtpushpapandey के द्वारा
March 18, 2012

प्यारे पुत्र अनिल जी आपको मेरा लेख अच्छा लगा इसके लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद मेने यह लेख किसी लालच से नहीं लिखा है आप जैसे कई युवक युवतियों की यह आम समस्या है जिसे सरकार की तरफ से खुली छुट है लेकिन समाज परिवार अभी भी इस समस्या को नहीं समझ पा रहा यदि परिवार इस समस्या को समझ ले तो समाज में स्वयं ही प्रेम विवाह को मान्यता मिल जायेगी यह एक इतनी गंभीर समस्या है जिसका समाधान होना बहुत आवश्यक है आये दिन लड़के लड़कियां इस समस्या से तंग आकर मोत को गले लगा लेते हैं जबकि उनकी उम्र संसार देखने की और खुशियाँ देखने की होती है मेरी यह समझ में नहीं आता की जो माता पिता अपने बच्चो को ऊँगली पकड़कर चलना सिखाते हैं पाल पोस कर बड़ा करते हैं और पढ़ाते लिखाते हैं तो किस निर्दयता से वह अपने बच्चो को मोत के आगे झोक देते हैं यह उनके जीवन भर की ख़ुशी होती है अपने बच्चो की इस ख़ुशी को किस तरह निर्दयता से हम नज़रअंदाज कर देते हैं यदि वह इसमें सहयोग दे तो यह उनका अपने बच्चो के प्रति सबसे बड़ा कर्त्तव्य होगा ज्यादा न लिखते हुए में येही चाहूंगी यदि इसमें एक सामाजिक क्रांति आ जाये तो में अपना लेख सार्थक समझूंगी धन्यवाद

    March 18, 2012

    सादर चरण स्पर्श! आपने मुझे पुत्र कहा मेरे लिए सौभाग्य की बात है. पर आपने मेरे नाम के साथ ‘जी’ लगाकर, एक ही पल में अपना से पराया कर दिया, यह अच्छा नहीं लगा. आपके इस आलेख के विचार तर्कसंगत के साथ-साथ हमारी भारतीय संस्कृति और मानवता को सपोर्ट करते है. आपने ऐसी कोई बात नहीं जिसको कही से भी कटा जाय. आपने एक पाक रिश्ते को समर्थन दिया हैं. जो मुझे बहुत अच्छा लगा. मैं इस मंच से सामाजिक कुरूतियों के विरुद्ध अभियान की शुरुवात किया हूँ. अतः यह विचार और अभियान का चाहें कोई भी चेहरा हो मैं उसका सपोर्ट करूँगा . वैसे भी मैं कोई व्यक्ति नहीं बल्कि एक विचार हूँ जिसे समाज के कुरीतियों ने जन्म तो दे दिया पर मुझे ख़त्म नहीं कर सकता. यह विचार मेरे जिन्दा रहने के साथ भी है और मेरे मरने के बाद भी………एक बेटा अपने माता को विश्वास दिलाता है कि उसका लेख जरुर सार्थक होगा…….बस आपका आशीर्वाद चाहूँगा…………..आपका पुत्र, अलीन.

chandanrai के द्वारा
March 17, 2012

आदरणीय साहब, आपने चेहरों के पीछे के यथार्थ से जो एक नव परिचय कराया उसके लिए आपका धन्यवाद बिलकुल ठीक विचार ! बहुत बेहतर Pls. comment on http://chandanrai.jagranjunction.com/मेरे लहू का कतरा कतरा तिरंगा

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
March 16, 2012

स्नेही अनिल जी, शुभासीश . बचना चाहें तो टकराते हैं चेहरे; इन चेहरों से कैसे, बचाएं चेहरें, जिधर जाएँ, उधर नजर आते हैं चेहरे. दिल सच्चा चेहरे हैं झूठे. बधाई.

    March 18, 2012

    सादर प्रणाम! आपका आशीर्वाद पाकर गौरान्वित हुआ…..आपने सच कहा दिल सच्चा चेहरे हैं झूठे क्योंकि चेहरे की हकीकत क्या है…आज भी एक अनबुझ पहेली. इसलिए हमेशा हम चेहरे को लेकर एक गलत फहमी में रहते हैं. इसीलिए मैं अपना चेहरा छुपा के रखना चाहता था. विशेष रूप से साहित्य जगत में…………..परन्तु

chaatak के द्वारा
March 16, 2012

चेहरों का अच्छा विश्लेषण प्रस्तुत करती इन पंक्तियों पर हार्दिक बधाई!

jlsingh के द्वारा
March 16, 2012

काली घटा से चाँद जब छुप जाता है. बारिश के बाद उजाला खूब भाता है! बहुत खुशी हुई होली के रंग धोने के बाद, आपको धवल परिधान में देखकर!

    March 16, 2012

    सर, दरअसल मैं होली में रंग नहीं खेलता हूँ बल्कि मेरे साथ लोग रंग खेलते हैं. यह चेहरा उसी का नतीजा था.पर मेरी भी हसरत है, रंग खेलने की …..पर अनजानी के साथ…….आप सबका आशीर्वाद रहा तो एक दिन मेरी जिंदगी में अनजानी होली के रंग और ख़ुशी लिए जरुर आएगी. बस उस दिन का इंतजार…..

mataprasad के द्वारा
March 15, 2012

अनिल कुमार ‘अलीन’ जी नमस्कार , बहुत सुन्दर प्रस्तुति ।। एक जाना सा चेहरा , पहचाना सा चेहरा आखों में बस जानेवाला प्यारा सा चेहरा जब हकीकत आया सामने उस चेहरे का , शर्म से झुक गया अपना ही चेहरा।।

    jlsingh के द्वारा
    March 16, 2012

    माता प्रसाद जी, बहुत खूब!

    March 16, 2012

    सादर नमस्कर! बहुत खूब ….माता प्रसाद जी, चेहरे की हकीकत का क्या कहना? आपके इस रचना से प्रभावित होकर, एक बार फिर चेहरे पर रचना करूँगा…..परन्तु इस मंच पर अभी नहीं लाऊंगा क्योंकि अब तक जो भी यहाँ रचना पोस्ट किया हूँ, सभी ५-१० साल पहले की है……और आगे भी सिलसिला जरी रखूँगा. मगर मेरे लेख हमेशा तत्कालीन होते हैं. वैसे इसके बाद जो कविता या ग़ज़ल पोस्ट करूँगा. वह ४-५ दिन पहले की है. परन्तु उसके लिए अभी आपको १५-२० दिन और इंतजार करना होगा क्योंकि अभी एक लेख लिखने जा रहा हूँ …. …..हार्दिक आभार.

shashibhushan1959 के द्वारा
March 15, 2012

मान्यवर अनिल जी, सादर ! बहुत भावपूर्ण रचना ! बधाई !

    March 16, 2012

    सादर चरण स्पर्श, पिता श्री! …हार्दिक आभार. एक विनती कभी आशीर्वाद भी दे दिया करिए…

ANAND PRAVIN के द्वारा
March 15, 2012

मित्र………….चलो होली के रंग में रंगा कर तुम हम सबों के सामने आये तो सही…………..वरना तुम्हारे वो आसूं देख – देख निरास हो चला था……………….चेहरों के बारे में बहोत ही सुन्दर कविता…….चेहरे इन्शान की फितरत होते है……जो हमें भगवान् की एक देन के रूप में मिलता है……….पर एक बात बोलना चाहूँगा………….’दिल को देखो चेहरा ना देखो……………आगे तो सब जानते ही है………………..लिखते रहो……..

    March 16, 2012

    चेहरे ने लाखों को लुटा, दिल सच्चा और चेहरा झूठा………सच कहा मित्र………..हार्दिक आभार.

March 15, 2012

अनिल भाई नमस्कार ! चेहरों के पीछे की दास्तां और उसकी दुनिया का खूबसूरत प्रश्तुतिकरण ….किसी शायर ने कहा है की” हर आदमी मे होता है दस बीस आदमी, हो देखना अगर तो बार बार देखिये……चेहरे के ऊपर चेहरे लगा लेते हैं हैं लोग और दुनिया से सरेआम छुपा लेते हैं लोग……………….सुंदर रचना। बधाइयाँ !

    March 16, 2012

    सादर प्रणाम! सर, भाई कहकर शर्मिंदा न करें, आपके अभिवादन करते समय प्रणाम लिखता हूँ. इसका मतलब निश्चय ही मेरी नज़र में आप उच्च स्थान रखते है.हा, कहना ही है तो अनुज कहिये……..हार्दिक आभार.

Santosh Kumar के द्वारा
March 15, 2012

अनिल जी ,.नमस्कार इतने चेहरों के बीच आपका चेहरा देखकर बहुत अच्छा लगा ,..बहुत बधाई

    March 16, 2012

    आपको अच्छा लगा इससे बढ़कर मेरे लिए क्या हो सकता है……..हार्दिक आभार!

akraktale के द्वारा
March 15, 2012

अनिल जी नमस्कार, चेहरों के पीछे भी एक दास्तां है, यह चेहरों की दुनिया और ये दुनिया के चेहरे; गौर से देखों, राज-ए-दिल खोलते हैं चेहरें, खामोश हो होंठ तो बोलते है चेहरे; मुश्किलों में कुछ यूँ, साथ निभाते हैं चेहरे, रोती हैं आखें, पर मुस्कुराते है चेहरे. चेहरा सब बता देता है.बहतु सुन्दर काव्य रचना. बधाई.

vikramjitsingh के द्वारा
March 14, 2012

अनिल जी सादर, बहुत सुन्दर कविता है, आपकी और पेश करने का ढंग भी…. धन्यवाद….

sinsera के द्वारा
March 14, 2012

अनिल जी,नमस्कार, “इन चेहरों में कैसे पहचानें चेहरे, वो जो एक चेहरे पर लगे हैं अनेक चेहरे….” तो आप ने चेहरे पर ग़ज़ल लिखने तक अपने चेहरे को छुपा रखा था… ग़ज़ल और चेहरे दोनों पर ही “लाइक…. ” :-)

    March 14, 2012

    सादर नमस्कार! सच कहा आपने, बहुत ही मुश्किल होता है, चेहरों के बिच में एक चेहरे को पहचानना ……हार्दिक आभार!

minujha के द्वारा
March 14, 2012

अलीन जी,चलिए इस चेहरे की दास्तां ने कम से कम आपके दर्शन तो कराए,अच्छी रचना की बधाई आपको

    March 14, 2012

    सादर नमस्कार! ऐसी कोई बात नहीं है, सच पूछिये तो एक चेहरा कभी भी किसी व्यक्ति का पहचान नहीं हो सकता है. आज लोगों के नजर में कुछ सम्मान है मेरा, कल हो सकता है कि मैं उनके नज़रों में गिर जाऊ . यह सब कुछ निर्भर करता है कि सामने वाला मेरे चेहरे और व्यक्तित्व को किस रूप में लेता है…….हार्दिक आभार.

yogi sarswat के द्वारा
March 14, 2012

अलीन जी , आप नज़र आये भी तो बिलकुल कलरफुल होकर ! मस्त कलर लगे हैं ! आपने बिलकुल सही फ़रमाया है की चेहरा भी कुछ कहता है इनके पीछे भी दास्ताँ होती है ! और आपने जो रचना दी है , अति उत्तम है ! कभी ख़ुशी बनकर, हंसातें है चेहरे, कभी गम बनकर, रुलाते हैं चेहरें; कभी ऊँचाइयों पर, चढातें है चेहरें, कभी खाइयों में, गिराते है चेहरे.

    March 14, 2012

    सादर अभिवादन, योगी जी. आपका कमेन्ट हमेश मेरे लिए विशेष होता है. क्यों, यह तो मैं नहीं बताने वाला……एक बार फिर हार्दिक आभार.

Aakash Tiwaari के द्वारा
March 14, 2012

अनिल जी, सुन्दर रचना.. आकाश तिवारी

dineshaastik के द्वारा
March 14, 2012

चेहरे की महिमा औ चेहरा है सुन्दर, छुपा क्या रखा भाई चेहरे के अन्दर, चेहरे मैं सचमुच बहुत खाशियत है, न देखेगा कोई ये अश्के-समुन्दर। सुन्दर भावाभिव्यक्ति के लिये बधाई…..

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    March 14, 2012

    बहुत सुन्दर अनिल जी. गौर से देखों, राज-ए-दिल खोलते हैं चेहरें, खामोश हो होंठ तो बोलते है चेहरे; मुश्किलों में कुछ यूँ, साथ निभाते हैं चेहरे, रोती हैं आखें, पर मुस्कुराते है चेहरे. बहुत सुन्दर पंक्तियाँ हैं.

    March 14, 2012

    सादर प्रणाम, सर ! आपका प्यार और आशीर्वाद मिला……हार्दिक आभार.

    March 14, 2012

    दिनेश भाई, अब आप भी मजाक करने लगे. कर लीजिये…. कर लीजिये……..हार्दिक आभार.

ajaydubeydeoria के द्वारा
March 13, 2012

अनिल भईया नमस्कार, अजीब दास्ताँ है ये ,कहाँ शुरु कहाँ ख़तम…. चेहरे के दो आगे चेहरे, चेहरे के दो पीछे चेहरे….. चेहरों का ये मायाजाल ….. सुन्दर… अति सुन्दर….

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    March 13, 2012

    बच के कहाँ जायेंगे. हम तो सदैव आपके लिए हाज़िर हैं….फोटो बहुत सुन्दर लगाये हैं, चेहरा छुपाने का अच्छा तरीका…

    March 14, 2012

    अजय भाई, आप दो-दो चेहरों की बात करते हैं. पता नहीं जाने कितने चेहरे है एक चेहरे के पीछे…..

jlsingh के द्वारा
March 13, 2012

अनिल भाई, नमस्कार! बहुत ही सुन्दर चेहरा बनाया (छुपाया) है कि रोती ऑंखें भी गायब हो गयी, क्यों ऑंखें … मुश्किलों में कुछ यूँ, साथ निभाते हैं चेहरे, रोती हैं आखें, पर मुस्कुरतें है चेहरे. अच्छी प्रस्तुति! प्रवीन जी नजर नहीं आ रहे हैं! आनंद में कमी दिख रहे है!

    March 14, 2012

    सादर प्रणाम! सर, भाई कहकर शर्मिंदा न करें, आपके अभिवादन करते समय प्रणाम लिखता हूँ. इसका मतलब निश्चय ही मेरी नज़र में आप उच्च स्थान रखते है. हा, कहना ही है तो अनुज कहिये…….प्रवीन जी नजर आयेंगे कैसे क्योंकि उनकी और मेरी दोस्ती तो इसी मंच पर शुरू हुई है परन्तु ख़त्म चाँद और तारों के ख़त्म होने के साथ होगी. अभी तक हम दोनों दोस्त आमने-सामने नहीं हुए है फिर भी……अब आगे प्रवीन जी मेरी बात को पूरा करेंगे.


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