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हमारी सदा- एक अफ़सोस

Posted On: 22 Sep, 2012 Others,न्यूज़ बर्थ में

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मेरी सदा- एक अफ़सोस पिछले दिनों आप सभी द्वारा मेरी प्रेम कहानी ( मेरी सदा- एक अधूरी परन्तु सच्ची प्रेम कहानी ) पर प्राप्त प्रतिक्रियाओं और सुझावों को ध्यान में रखते हुए हम (अन्जानी-अनिल) एक नए जीवन की शुरुवात करने जा रहे हैं. अपनी अधूरी कहानी को मुकम्मल करने के अपने रिश्ते को खुबसूरत अंजाम देने जा रहे हैं. जिसको लेकर हम दोनों काफी प्रसन्न और उत्सुक है. परन्तु अफ़सोस इस बात का है कि इस महत्वपूर्ण अवसर पर हमारे अपनों का आशीर्वाद साथ नहीं हैं. हम हर मुमकिन कोशिश कर लिए उन्हें मनाने की. पर अफ़सोस हम हर बार नाकामयाब रहे और हमें हमारे अपनों द्वारा डाट-फटकार, मार और धमकियों के सिवा कुछ नहीं मिला. हमें उनसे कोई शिकायत नहीं हैं और न ही कोई शिकायत इस समाज से है. हमें अपनों और समाज से बहुत कुछ मिला जो हमारी योग्यता और जरुरत से जयादा है. जिसके लिए हम दोनों दिल से आप सभी के आभारी हैं. परन्तु हमें शिकायत है उस विचार धारा से जो खुद को मर्यादित और सभ्य कहते हुए, मानवीय मूल्यों को नजर-अंदाज़ करते हुए अपने स्वार्थ और अहंकार वश हमारी खुशियों का गला घोटती हैं. हमें शिकायत है उस विचार धारा से जो स्वार्थ, सत्ता और वर्चस्व के अनुसार भारतीय संस्कृति को नज़र-अंदाज़ करते हुए झूठे परम्पराओं और रीति-रिवाज को जन्म देती है जिससे मानवता और मानवीय अधिकारों का हनन होता है.
हमने कभी नहीं सोचा था कि जिन अपनों के बिना हम एक पल नहीं रह पाते हैं एक दिन उनसे ही भागना पड़ेगा. आज हम अपने रिश्ते को एक खुबसूरत और पवित्र बंधन में बाँधने जा रहे हैं जिसे शादी कहते हैं परन्तु अफ़सोस अपनो से दूर होकर. एक ऐसी जगह जिसके बारे में हम कुछ ज्यादा नहीं जानते. अतः हमें नहीं पता कि हम कामयाब होंगे या नहीं, हमें नहीं पता कि हम जिन्दा अपनों के पास लौट पाएंगे कि नहीं, हमें नहीं पता कि हमारे अपने हमें अपनाएंगे कि नहीं. हम जानते हैं कि दुनिया में बहुत बुराई है पर कभी सामने से फेस नहीं किये हैं. हो सकता है कि इन्हीं बुराइयों का हम दोनों शिकार हो जाएँ और जिंदगी की तलाश में मौत हाथ लगे. .ऐसे तमाम सवाल ह्रदय में दबाये हुए एक खुबसूरत मोड़ की तलाश में हम दोनों निकल पड़े हैं. साथ ही ऐसे तमाम सवाल आपके बीच छोड़े जा रहे हैं ……आखिर हम बच्चों को अपनी इच्छा अनुसार शादी जैसे पवित्र रिश्ते में बंधने के लिए अपनों और अपने समाज से क्यों भागना पड़ता है जबकि धर्म, भगवन और कानून सभी हमें अपना जीवनसाथी चुनने का अधिकार दते है तो फिर इसे मुकम्मल करने के लिए आप सभी का आशीर्वाद क्यों नहीं? हमें आपकी जिंदगी जीने से कोई ऐतराज नहीं परन्तु हमें अपनी जिंदगी जीने का अधिकार चाहिए. हमें आपकी खुशियों से कोई ऐतराज नहीं परन्तु हमें अपनी खुशियाँ चाहिए. हमें आपके प्रति कर्तव्यों और दायित्वों का पूरा बोध हैं परन्तु भागवान के लिए इसके नाम पर हमारी खुशियों और अधिकारों का हनन मत करिए. झूठी मान-मर्यादा और अहंकार ने हम जैसे बहुतों को काल के गाल में भेज दिया. भगवान् के लिए अब आप सभी इस अमानवीय कुकृत्य को बंद करिए…………..आने वाले दिनों में हमारे साथ क्या होगा यह तो बताना मुश्किल है परन्तु हम आशा करते हैं कि जो भी होगा मानवता और हम जैसे बच्चों के हित में होगा. हम आशा करते हैं कि हमारी सदा उन माता-पिता के ह्रदय तक जरुर पहुंचेगी जो झूठे शान और मर्यादा के नाम पर अपने बच्चों के खुशियों का गला घोटते हुए उन्हें मौत के मुँह में झोक देते हैं जहाँ अंधेरों और दर्द- चीख के सिवा कुछ और नज़र नहीं आता. यदि हमारे प्रयास से एक भी माता-पिता अपने संतानों की खिशियों के लिए उन्हें आशीर्वाद देते और गले लगाते हैं, यदि इस प्रयास से एक भी जीवन हम बचाने में कामयाब रहे…………….तो हम समझेंगे कि हमारी कहानी आपके बीच लाने की सफल रही……………!
इस मुश्किल घड़ी में आपके प्यार और आशीर्वाद के इच्छुक ………………………………………….अब हम इस अनजाने सफ़र पर चलने की इजाजत चाहेंगे………………………….अन्जानी-अनिल
मेरी सदा- एक अफ़सोस

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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
December 5, 2013

सुन्दर ,कभी इधर भी पधारें सादर मदन

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
October 30, 2012

parinaam ki ghoshna kab hogi.

    October 30, 2012

    सादर चरण स्पर्श, नाना जी…………………….फिलहाल तो खुश खबरी यह है……………कि आपका यह नाती परिणय सूत्र में…………बंध चूका है…………परिणाम कि चिंता तो लोभी और स्वार्थी लोग करते हैं……………….मैं तो बस इतना कोशिश करता हूँ कि मेरा हरेक कदम मानवता के भलाई और रुढिवादिता के खिलाफ हो………………….तथा हमारे रिश्ते और बंधन………….स्वार्थ, सत्ता और वर्चस्व से मुक्त हो ……………चारो तरफ बस समर्पण और प्यार…………..

yogi sarswat के द्वारा
October 30, 2012

हमें आपके प्रति कर्तव्यों और दायित्वों का पूरा बोध हैं परन्तु भागवान के लिए इसके नाम पर हमारी खुशियों और अधिकारों का हनन मत करिए. झूठी मान-मर्यादा और अहंकार ने हम जैसे बहुतों को काल के गाल में भेज दिया. भगवान् के लिए अब आप सभी इस अमानवीय कुकृत्य को बंद करिए…………..आने वाले दिनों में हमारे साथ क्या होगा यह तो बताना मुश्किल है परन्तु हम आशा करते हैं कि जो भी होगा मानवता और हम जैसे बच्चों के हित में होगा. हम आशा करते हैं कि हमारी सदा उन माता-पिता के ह्रदय तक जरुर पहुंचेगी जो झूठे शान और मर्यादा के नाम पर अपने बच्चों के खुशियों का गला घोटते हुए उन्हें मौत के मुँह में झोक देते हैं जहाँ अंधेरों और दर्द- चीख के सिवा कुछ और नज़र नहीं आता. यदि हमारे प्रयास से एक भी माता-पिता अपने संतानों की खिशियों के लिए उन्हें आशीर्वाद देते और गले लगाते हैं, यदि इस प्रयास से एक भी जीवन हम बचाने में कामयाब रहे…………….तो हम समझेंगे कि हमारी कहानी आपके बीच लाने की सफल रही……………! मित्रवर आज तुम्हारी करनी और कहनी एक सी प्रतीत होती है ! आप जैसा कहते हैं , वैसा ही करते हैं ! आप सच्चे मानवदूत हो ! बहुत बहुत शुभकामनाएं

    October 30, 2012

    हार्दिक आभार श्रीमान…………………मैं सोचता हूँ कहने और करने की जरूरत क्या है…………….क्योंकि यह दोनों शब्द यह इंगित करते हैं कि जो हम नहीं है वो होने कि कोशिश कर रहे हैं अर्थात एक नकाब चेहरे पर रखना चाह रहे हैं…………आपकी मित्रवत प्रतिक्रिया मिली अच्छी लगी……………और उससे भी अच्छा यह लगा कि काफी हद तक मेरे विचार सुचारू रूप से आप तक पहुच रहे हैं…………..एक बार फिर आपका हार्दिक आभार!

ANAND PRAVIN के द्वारा
September 23, 2012

खबर जान ख़ुशी हुई मित्र…………तुम अपने पथ पर विजय बनो…………प्रेम पथ की विजय सबसे बड़ी जीत होगी जीवन की फिर बाकी सब छोटा लगने लगेगा………..पुनः शुभकामना

    October 21, 2012

    शुक्रिया मित्र …………………….असली विजय तो तब होगी जब हमारे अपने इस सत्य को स्वीकार कर लेंगे………………….वरना यह हमारी भी हार है और उनकी भी …….बस समझने का फेर है…… जब मानव स्वार्थ, वर्चस्व और सत्ता वश सीमायें और मान्यताओं को स्थायी कर देता है तो उसे सत्य दिखाई नहीं देता…………………और ऐसे में सत्य की स्थापना के लिए अपनों से युद्ध करना अवश्यम्भावी हो जाता हैं परन्तु जिस सत्य के लिए हम अपनों से युद्ध करते हैं यदि उसे हम भी स्थायी कर दे तो वो एक बार फिर असत्य में बदल जाता है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,अतः बेहतर है कि हम सभी सीमाओं और मान्यताओं से ऊपर उठकर मानव और प्राणी कल्याण की बातें सोचें,,,,,,,,,,,,,,आमीन!

jlsingh के द्वारा
September 23, 2012

प्रिय अनिल जी, आप दोनों को ढेर सारी शुभकामनाएं! उम्मीद है कुछ समय के उपरान्त समाज और परिजन सत्य को मान लेंगे, और अपना भी लेंगे क्योंकि यह कोई नयी बात नहीं है …. समय के अनुसार मान्यताएं बदली है…. और बदलनी भी चाहिए ! पुन: शुभकामना सुन्दर और सुखमय भविष्य के लिए!

    October 21, 2012

    सादर प्रणाम! ……………………………..जी परिवर्तन एक ऐसा सत्य है जिसे अस्वीकार नहीं किया जा सकता………..वरना सीमायें और म्न्य्ताओं को स्थायी करने पर युद्ध अवश्यम्भावी हो जाता है ……………आरम्भ से लेकर अब तक जितने भी युद्ध और हिंसा होते आये हैं .इसी सत्य को अस्वीकार करने के कारन हुआ है…………..आशा करते हैं कि हम सभी में बुद्धि और चेतना का संचार सही दिशा में हो ताकि हम सत्य को स्वीकार कर सके……………….और इस धरती को रक्तरहित बना सके……………….ताकि पूरी दुनिया में में भाईचारे और मुहब्बत का संचार हो………………….आमीन…………….!

vikramjitsingh के द्वारा
September 22, 2012

आप दोनों का साथ कयामत तक बना रहे…… शुभ कामनाएं…….

yogeshkumar के द्वारा
September 22, 2012

भाई दिल वाले…. दुलहनिया ले आये …. बहुत अच्छा … ग्रेट !!!!!!!!! शुभ कामनाएं …. अच्छा ही होगा ….

Santosh Kumar के द्वारा
September 22, 2012

ढेर सारी शुभकामनाये ,…ईश्वर आपकी सभी आशाओं और सदिच्छाओं को पूरा करें !

    October 19, 2012

    सादर प्रणाम! ईश्वर हम सबकी मदद करें…………………ताकि इस दुनिया को हम खुबसूरत बना सके…………………


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