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हमारे प्यार का इन्तहा अभी बाकी है

Posted On: 29 Dec, 2013 कविता,Entertainment,lifestyle में

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हमारे प्यार का इन्तहा अभी बाकी है

हमारे प्यार का इन्तहा अभी बाकी है,

इसके बाद भी एक और जहाँ बाकी है.

किसको अफ़सोस है यहाँ बिछड़ने का,

जब बिछड़कर मिलना वहां बाकी है.

थमती हुई साँसों से मायूसी कैसी,

धड़कनों के लिए एक और जहाँ बाकी है.

बेशक जिस्म से निकलेगी रूह अपनी,

अभी मरने के लिए एक और जहाँ बाकी है.

…………………...29/12/2013

……………………अनिल कुमार ‘अलीन’

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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 3, 2014

अनिल जी , सप्रेम !…… कविता में जिस तरह से छंद होते हैं ठीक उसी तरह ग़ज़ल में बहर का प्रावधान होता है | ग़ज़ल में बहर ही छंद है इसे आप मीटर भी कह लें तो कोई अनौचित्य नहीं | कुछ ग़ज़लें छोटी बहर की होतीं हैं तो कुछ बड़ी बहर में | सामान्यतः ग़ज़लों में पांच बहरों का होना आवश्यक होता है तभी वह पूरी ग़ज़ल होती है | वैसे आप पांच से अधिक भी लिख सकते हैं ! मैं अब सोंच रहा हूँ कि क्यों न इस पर विस्तार से लिखा जाए ! उस दिशा में शीघ्र ही कोशिश करूंगा | शेष शुभ !

    January 4, 2014

    हार्दिक आभार सर………………………………………..बिलकुल सही कदम होगा यदि आप इस पर विस्तार से चर्चा करें…………………क्यों न आप इस पर एक लिखते ताकि और लोग भी जो गजल लिखना सीखना चाहते हैं. वह इससे लाभान्वित हो सके. मैं तो पहले ही स्पष्ट कर चूका हूँ कि मैं तो सारी विधाओं से मुक्त होकर लिखता हूँ ………..बस दिमाग में एक लय उत्पन्न होती है और उसके साथ शब्द जुड़ते जाते हैं………..फिर भी आपकी बातों पर अमन करते हुए यह पूरी कोशिश करूँगा कि उस लय को और बेहतर ढंग से सुसज्जित कर सकू………….अतः आपका मार्गदर्शन हमेशा ही हमारे लिए उपयोगी…….

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 2, 2014

एक मुक्कमल ग़ज़ल पर इसमें एक बहर और होनी चाहिए ! अलीन जी, बहुत-बहुत बधाई !

    January 2, 2014

    हार्दिक आभार, सर! यह बहर क्या होता है? कृपया मार्गदर्शन करें………………………………..

ranjanagupta के द्वारा
January 1, 2014

अलीन जी !बेहद सुन्दर शब्द रचना !सद्भावनायेँ !!

sanjay kumar garg के द्वारा
January 1, 2014

अच्छे उदगार अनिल जी! साथ ही नए वर्ष कि हार्दिक शुभकामनाये!

sadguruji के द्वारा
January 1, 2014

बहुत अच्छा.अंग्रेजी नववर्ष आपके लिए और आपके परिवार के लिए मंगलमय हो.

    January 1, 2014

    जी, आपको भी! मेरी एक समस्या है और वह यह कि आपके ब्लॉग पर कमेन्ट करने पर पास नहीं होता…………….कहीं स्पैम में तो नहीं जाता ………………..कृपया एक पर चेक करना चाहें…………..

विनय सक्सेना के द्वारा
December 31, 2013

शानदार अनिल साहब……..विनय सक्सेना “रिमझिम फुहार”

Santosh Kumar के द्वारा
December 31, 2013

वाह अनिल भाई ….शानदार लेखनी …..सादर प्रणाम जहाँ भी जायेंगे मोहब्बत ही करेंगे मोहब्बत साथ है तो बिछड़ना कैसा ….


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